26 साल बाद भी नहीं बनी नीति, बेरोजगार लैब टेक्नोलॉजिस्टों का फूटा गुस्सा; “सरकार जवाब दे – आखिर कब मिलेगा रोजगार?” 19 मई को सचिवालय कूच और अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

देहरादून। उत्तराखंड में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट (एमएलटी) युवाओं की लगातार हो रही उपेक्षा अब बड़े आंदोलन का रूप लेने लगी है। राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी मेडिकल लैब तकनीशियनों के लिए स्पष्ट सेवा नियमावली, पद सृजन और नियमित भर्ती प्रक्रिया लागू न होने से नाराज युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड ने सरकार को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 19 मई को सचिवालय कूच किया जाएगा और उसके बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

“डिग्री हाथ में, लेकिन नौकरी नहीं”; हर साल तैयार हो रहे युवा, फिर भी रोजगार के दरवाजे बंद

उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से बीएससी मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी कोर्स संचालित हो रहा है और हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर बाहर निकल रहे हैं। लेकिन दुखद स्थिति यह है कि सरकार के पास इन प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।

संगठन का कहना है कि अभ्यर्थियों का पंजीकरण होने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। वर्षों तक पढ़ाई और प्रशिक्षण लेने के बाद भी जब रोजगार नहीं मिलता तो युवाओं में निराशा, हताशा और आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक है। कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार करने की कगार पर पहुंच चुके हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

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आईपीएचएस 2012 के प्रस्ताव पर शासन की आपत्तियां; “फाइलें घूमती रहीं, लेकिन समाधान नहीं निकला”

संगठन ने आरोप लगाया कि पूर्व में आईपीएचएस 2012 मानकों के अनुरूप लैब तकनीशियनों के पद सृजन और सेवा नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया गया था। उम्मीद थी कि इससे प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार का रास्ता मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी। लेकिन शासन स्तर पर बार-बार आपत्तियां लगाकर इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण वर्षों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। यही वजह है कि सैकड़ों प्रशिक्षित लैब तकनीशियन आज भी बेरोजगार घूमने को मजबूर हैं। संगठन ने इसे युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय करार दिया।

निजी लैब्स को बढ़ावा, स्थायी रोजगार खत्म, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण पर भी उठे सवाल

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश की कई सरकारी लैब्स को निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इससे स्थायी रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार यदि स्वयं लैब्स संचालित करे और नियमित पदों पर नियुक्तियां करे तो एक ओर बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी मिल सकेंगी।
पदाधिकारियों ने निजी लैब्स की जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई बार रिपोर्टों की विश्वसनीयता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे आम लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी और प्रशिक्षित सरकारी स्टाफ की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।

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पहाड़ों में जांच सुविधा का संकट

छोटी जांच के लिए भी मरीजों को तय करनी पड़ रही लंबी दूरी
संगठन ने प्रदेश के पर्वतीय और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि इन इलाकों में लैब तकनीशियनों की भारी कमी है। हालत यह है कि कई स्थानों पर लोगों को सामान्य जांच कराने के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

इससे न केवल गरीब और ग्रामीण मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि समय पर जांच न होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी गंभीर हो जाती हैं। संगठन ने कहा कि यदि सरकार समय रहते पर्याप्त पद सृजित कर नियुक्तियां करती तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।

आयु सीमा पार कर रहे युवाओं में बढ़ी चिंता, “सरकार दे एकमुश्त आयु में छूट”

मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि आईपीएचएस 2012 के अनुसार जल्द से जल्द पदों का सृजन किया जाए और रिक्त पदों को वर्षवार मेरिट के आधार पर पारदर्शी तरीके से भरा जाए। संगठन ने यह भी मांग उठाई कि लंबे समय से भर्ती न होने के कारण जो अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर चुके हैं या उसके करीब पहुंच गए हैं, उन्हें एकमुश्त आयु में छूट दी जाए।
संगठन का कहना है कि सरकार की देरी का खामियाजा युवाओं को नहीं भुगतना चाहिए। वर्षों तक भर्ती न निकालना और फिर आयु सीमा के आधार पर युवाओं को बाहर कर देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण होगा।

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19 मई को सचिवालय कूच की चेतावनी, मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और उग्र

संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट आंदोलन को और तेज करेंगे। 19 मई को सचिवालय कूच के साथ अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।

संगठन का कहना है कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। युवाओं को रोजगार और स्पष्ट नीति चाहिए। वर्षों से लंबित मांगों को नजरअंदाज करना सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष आशीष चन्द्र खाली, महासचिव मयंक राणा, उपाध्यक्ष रणवीर बिष्ट, रजत नौटियाल, गणेश गोदियाल, भगवती प्रसाद, मुकेश सजवान, आशीष शर्मा, राजमोहन नेगी, दीपक जगवान, धनबीर बगियाल, प्रवीण, अभिषेक सोलंकी समेत कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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